पाठ्यक्रम: GS3/ रक्षा
संदर्भ
- संयुक्त राज्य अमेरिका-नेतृत्व वाले गठबंधन (जिसमें इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं) तथा ईरान के बीच नवीनीकृत शत्रुता ने पश्चिम एशिया में हाल ही में एकीकृत क्षेत्रीय वायु एवं मिसाइल रक्षा नेटवर्क की परीक्षा ली है।
मिसाइल रक्षा प्रणाली क्या है?
- मिसाइल रक्षा एक एकीकृत सैन्य प्रणाली है, जिसका उद्देश्य आने वाली मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुँचने से पहले पहचानना, ट्रैक करना, रोकना और नष्ट करना है, ताकि नागरिक आबादी, सैन्य प्रतिष्ठानों एवं महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा की जा सके।
- यह प्रणाली उपग्रहों, राडारों, कमांड केन्द्रों और इंटरसेप्टर मिसाइलों के नेटवर्क पर आधारित होती है, जो वास्तविक समय में मिलकर खतरे को निष्क्रिय करते हैं।
- आधुनिक मिसाइल रक्षा संरचना परतदार (layered) होती है, जिससे मिसाइल को उसके उड़ान के विभिन्न चरणों में रोकने के लिए अनेक अवसर निर्मित होते हैं।
इंटरसेप्टर कैसे कार्य करता है?
- इंटरसेप्टर एक रक्षात्मक मिसाइल है, जिसे आने वाले खतरे को नष्ट करने के लिए प्रक्षेपित किया जाता है। इसका संचालन कई समन्वित चरणों में होता है:
- पता लगाना (Detection): उपग्रह मिसाइल के प्रक्षेपण का पता लगाते हैं, और राडार उसकी गति, दिशा, ऊँचाई तथा संभावित प्रभाव बिंदु को ट्रैक करते हैं।
- निर्णय (Decision): कमांड केन्द्र में डेटा का विश्लेषण कर खतरे का आकलन किया जाता है और इंटरसेप्टर दागने का निर्णय लिया जाता है।
- प्रक्षेपण एवं मार्गदर्शन (Launch and Guidance): इंटरसेप्टर को दागा जाता है और राडार अपडेट्स के माध्यम से उसे लक्ष्य की ओर निर्देशित किया जाता है।
- विनाश (Destruction): इंटरसेप्टर लक्ष्य को या तो निकट विस्फोट (proximity fuse) द्वारा या सीधे उच्च गति की टक्कर (hit-to-kill) से नष्ट करता है।
- मूल्यांकन (Assessment): राडार विनाश की पुष्टि करता है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त इंटरसेप्टर दागे जाते हैं।
भारत की मिसाइल रक्षा संरचना
- बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली – DRDO के अंतर्गत:
- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD): 50 किमी से 180 किमी ऊँचाई पर आने वाली मिसाइलों को वायुमंडल के बाहर (exo-atmospheric) रोकने हेतु विकसित।
- एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD): पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर (endo-atmospheric) अंतिम चरण में 30 किमी तक की ऊँचाई पर खतरे को निष्क्रिय करने हेतु।
- परतदार वायु रक्षा कवच (Layered Air Defence Shield):
- लंबी दूरी (Long-Range): रूस निर्मित S-400 ट्रायम्फ प्रणाली, जिसे भारत ने मोबाइल सतह-से-आकाश मिसाइल (SAM) के रूप में शामिल किया है।
- मध्यम दूरी (70–100 किमी): भारत-इज़राइल द्वारा सह-विकसित बराक-8 (MRSAM/LRSAM), जो भूमि और नौसैनिक परिसंपत्तियों को 360-डिग्री सुरक्षा प्रदान करता है।
- लघु दूरी (25–50 किमी): स्वदेशी आकाश प्रणाली तथा इज़राइल की SPYDER प्रणाली, जो सामरिक स्थलों और मोबाइल सेना इकाइयों की रक्षा करती हैं।
- मिशन सुदर्शन चक्र: भारत द्वारा 2035 के लिए घोषित मिशन सुदर्शन चक्र एक व्यापक दृष्टि है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम, सर्वव्यापी राष्ट्रीय सुरक्षा कवच का निर्माण करना है।
अन्य देशों की प्रमुख वायु-रक्षा प्रणालियाँ
| देश/क्षेत्र | प्रमुख प्रणालियाँ |
| रूस | एस-400 ट्रायम्फ, एस-300वीएम, एस-350 वाइटाज़, एस-500 प्रोमेथियस |
| यूएसए | THAAD, पैट्रियट (PAC-3 MSE), गोल्डन डोम (डेवलपमेंट में) |
| इज़राइल | आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, आयरन बीम |
| चीन | HQ-9, HQ-22, HQ-16 |
| यूरोपीय स्काई शील्ड पहल (ESSI) | स्काईरेंजर, आईरिस-टी एसएलएम |
चुनौतियाँ
- अत्यधिक लागत: मिसाइल इंटरसेप्टर अत्यंत महंगे होते हैं, जिनकी प्रति इकाई लागत लाखों डॉलर तक होती है। इससे तब असमानता उत्पन्न होती है जब उनका सामना अपेक्षाकृत सस्ती आक्रामक मिसाइलों से होता है।
- सैचुरेशन हमले: बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन के प्रयोग से रक्षा प्रणालियाँ अभिभूत हो सकती हैं।
- हाइपरसोनिक हथियार: उच्च गति और गतिशीलता वाले हाइपरसोनिक हथियारों के कारण अवरोधन की संभावना कम हो जाती है।
आगे की राह
- मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ आधुनिक राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना का अनिवार्य अंग बन चुकी हैं। यद्यपि कोई भी प्रणाली पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, परंतु बहु-स्तरीय अवरोधन क्षमता रक्षा की दृढ़ता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है।
- भारत के लिए दीर्घकालिक सामरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु निम्न बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे:
- स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणालियों का विकास।
- उन्नत सेंसरों का एकीकरण।
- घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करना।
- यह सब एक ऐसे सुरक्षा वातावरण में आवश्यक है जो दिन-प्रतिदिन मिसाइल-केंद्रित होता जा रहा है।
Source: TH
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